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4 bad news from tvs motor Idfc first bank startup livespace rico auto layoffs corona pandemic pay cuts

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एक ओर कोरोना महामारी दुनिया भर में 50 लाख से ज्यादा लोगों को जकड़ चुका है तो वहीं इसके प्रभाव से लगातार नौकरियां छिन रही हैं। करोड़ लोग बेरोजगार हो चुके हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या की तरह कंपनियों से छंटनी और कर्मचारियों की सैलरी कट की बुरी खबरों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला टीवीएस मोटर कंपनी का है। कंपनी ने कोरोना वायरस महामारी के चलते छह महीने की अवधि के लिए अपने कर्मचारियों के वेतन में 20 प्रतिशत तक की कटौती की है।

टीवीएस मोटर ने कर्मचारियों के वेतन में अस्थायी कटौती की

कंपनी ने इस साल मई से अक्टूबर तक शुरुआती स्तर के कर्मचारियों को छोड़कर कार्यकारी स्तर पर वेतन कटौती का फैसला किया है। टीवीएस मोटर कंपनी के एक प्रवक्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”अप्रत्याशित संकट के मद्देनजर कंपनी ने छह महीने (मई से अक्टूबर, 2020) के लिए विभिन्न स्तरों पर वेतन में अस्थायी कटौती की है।

15 से 20 प्रतिशत तक वेतन कटौती

प्रवक्ता ने कहा कि श्रमिक स्तर पर काम करने वालों के वेतन में कोई कटौती नहीं होगी। वरिष्ठ कार्यकारी स्तर पर 15 से 20 प्रतिशत तक वेतन कटौती होगी, जबकि कनिष्ठ कार्यकारी स्तर पर पांच प्रतिशत वेतन कम होगा। टीवीएस मोटर कंपनी देश की तीसरी सबसे बड़ी दोपहिया कंपनी है। इससे पहले कंपनी ने बताया था कि उसने छह मई को देश भर में अपने सभी विनिर्माण संयंत्रों में परिचालन फिर से शुरू कर दिया है।  कंपनी के चार विनिर्माण संयंत्र हैं। इनमें से तीन भारत में (तमिलनाडु में होसुर, कर्नाटक में मैसूर और हिमाचल प्रदेश में नालागढ़) हैं और एक इंडोनेशिया के कारवांग में है।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक लेंगे 10 प्रतिशत कम वेतन

कोविड-19 के प्रभाव को देखते हुए निजी क्षेत्र के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के वरिष्ठ प्रबंधकों ने स्वैच्छिक रूप से 10 प्रतिशत कम वेतन लेने की घोषणा की है। बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी अपने वेतन में 30 प्रतिशत कटौती स्वीकार की है। बैंक ने सोमवार को एक बयान में कहा कि उसके वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारियों ने चालू वित्त वर्ष में स्वैच्छिक रूप से 10 प्रतिशत कम वेतन लेने की घोषणा की है।

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बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी. विजयनाथन ने भी अपने वेतन में 30 प्रतिशत कटौती की है। बैंक ने सभी कर्मचारियों को बनाए रखने की बात भी कही। इसमें महामारी से पहले नए भर्ती किए गए कर्मचारी भी शामिल हैं। बैंक ने कोविड-19 महामारी के बावजूद 2019-20 की बची अवधि के लिए अपने 78.2 प्रतिशत कर्मचारियों को 100 प्रतिशत परिवर्तनीय वेतन का भी भुगतान किया है।

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बैंक ने जानकारी दी कि उसके कर्मचारियों ने एक दिन का वेतन देकर कुल 3.29 करोड़ रुपये ‘आकस्मिक स्थितियों के लिए प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स) में दिए हैं। बैंक ने पीएम केयर्स में पांच करोड़ रुपये का योगदान दिया है। जबकि उसके प्रबंध निदेशक ने निजी तौर पर कोविड-19 राहत कार्य में 47 लाख रुपये का योगदान दिया है।

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बैंक की कोरोना वायरस के राहत कार्यों के लिए कुल 10.86 करोड़ रुपये का योगदान किया गया है। इसमें बैंक की ‘आस्क फॉर मास्क (मास्क के लिए पूछें), ‘गांव-गांव मास्क, ‘श्रमिक सहायता कार्यक्रम, ‘शेयर ए मील (साझा करें भोजन), ‘कोविड वारियर्स ऑन व्हील (कोविड-19 से लड़ रहे डिलिवरी कर्मी) और गिव इंडिया फाउंडेशन के साथ शुरू की गयी राहत पहलें शामिल हैं।

स्टार्टअप लिवस्पेस ने की 450 लोगों की छंटनी

बेंगलुरू के स्टार्टअप लिवस्पेस ने कोरोना वायरस महामारी तथा इसकी रोकथाम के लिये लॉकडाउन के कारण कारोबार प्रभावित होने से 15 प्रतिशत कर्मचारियों (450 लोगों) की छंटनी कर दी है। कंपनी ने यह निर्णय पिछले सप्ताह ही ले लिया था। लिवस्पेस की स्थापना रमाकांत शर्मा और अनुज श्रीवास्तव ने 2015 में की थी। यह कंपनी मकान मालिकों, प्रमाणित डिजायनरों और संबंधित सामानों के विक्रेताओं को साझा डिजिटल मंच मुहैया कराती है।

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कंपनी ने एक बयान में कहा, ”कोविड-19 महामारी के कारण आवश्यक सामग्रियों को छोड़ शेष सभी श्रेणियों में लोगों का व्यय कम हुआ है। प्रत्येक व्यवसाय की तरह लिवस्पेस ने भी व्यापार पर अचानक और अप्रत्याशित प्रभाव का अनुभव किया है।” इससे पहले अप्रैल में, इसके संस्थापकों ने अपना वार्षिक वेतन छोड़ दिया था। लिवस्पेस ने कहा, “इस फैसले के कारण लगभग 15 प्रतिशत यानी 450 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। ईमानदारी से कहें तो यह हमारे लिये अंतिम उपाय था।”

रिको ऑटो ने 119 स्थायी कर्मचारियों को निकाला

वाहनों के कल पुर्जे बनाने वाली रिको ऑटो इंडस्ट्रीज ने हरियाणा के धारूहेड़ा संयंत्र के 119 स्थायी कर्मचारियों को 22 मई को नौकरी से निकाल दिया। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि व्यावसायिक मांग के अनुसार कार्यबल को युक्ति संगत बनाने के लिए धारूहेड़ा संयंत्र में स्थायी कर्मचारियों के लिए अक्टूबर 2019 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) पेश की थी।

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हालांकि 208 में से केवल 42 ने ही वीआरएस योजना पेश की थी। लेकिन संयंत्र को चलाते रखने के लिए कंपनी को अपने कार्यबल में और कमी करने की जरूरत है। इसलिए कंपनी ने 119 और कर्मचारी हटा दिए हैं। कंपनी ने कहा कि इन सभी कर्मचारियों को औद्योगिक विवाद अधिनियम-1947 की धारा-25सी के तहत मुआवजे का भुगतान किया जाएगा। रिको विभिन्न दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए कलपुर्जों की आपूर्ति करती है।





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