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BCCI is open to reviewing its sponsorship policy for the next cycle but has no plans to end its association with current IPL title sponsor Vivo | क्रिकेट बोर्ड 440 करोड़ के लिए वीवो से करार खत्म नहीं करेगा, जबकि BSNL ने चीन के प्रोडक्ट बैन किए और रेलवे ने चीनी कंपनी से 471 करोड़ का करार रद्द किया

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  • बीसीसीआई के ट्रेजरर अरुण धूमल ने कहा कि वीवो से हमारा करार 2022 तक है, इसके बाद ही स्पॉन्सरशिप का रिव्यू किया जाएगा
  • उन्होंने कहा- बोर्ड वीवो से होने वाली कमाई पर केंद्र सरकार को 42 फीसदी टैक्स देता है, यह एक तरह से देश की मदद है
  • इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन चीनी कंपनी ली निंग से करार खत्म करने को तैयार, टोक्यो गेम्स तक है कॉन्ट्रैक्ट

दैनिक भास्कर

Jun 18, 2020, 10:44 PM IST

भारत-चीन विवाद के बाद से ही देश में चीनी कंपनियों के बायकॉट की मांग तेज हो गई है, लेकिन बीसीसीआई यानी भारत का क्रिकेट बोर्ड चीनी कंपनी वीवो से करार खत्म नहीं करना चाहता। आखिर बोर्ड को वीवो से हर साल 440 करोड़ रुपए जो मिलते हैं।स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी वीवो आईपीएल की स्पॉन्सर भी है।

बीसीसीआई के ट्रेजरर अरुण धूमल ने गुरुवार को कहा कि वीवो से हमारा करार 2022 तक है। इसके बाद ही स्पॉन्सरशिप का रिव्यू किया जाएगा।

बीसीसीआई के ट्रेजरर का यह बयान ऐसे वक्त सामने आया है, जब बीएसएनएल ने 4जी रिसोर्सेस के अपग्रेडेशन के लिए चीनी प्रोडक्ट्स बैन करने का फैसला किया है। रेलवे ने भी कहा है कि वह चीनी कंपनी को दिया सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन का 471 करोड़ का करार रद्द करेगा।

आईओए चीनी कंपनी से करार खत्म करने को तैयार

इधर, लद्दाख में भारत और चीन सेना के बीच हुई झड़प के बाद इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (आईओए) भी चीनी कंपनी ली निंग से करार खत्म करने को तैयार है। आईओए महासचिव राजीव मेहता ने कहा कि इस वक्त हम देश के साथ खड़े हैं। आईओए ने इस कंपनी से मई 2018 में करार किया था। इसके तहत कंपनी भारतीय एथलीट्स को करीब 5 से 6 करोड़ रुपए के स्पोर्ट्स किट देती है। 

बीसीसीआई की 5 दलीलें
1. पैसा आ रहा है, जा नहीं रहा
धूमल ने कहा कि वीवो से स्पॉन्सरशिप करार के जरिए पैसा भारत में आ रहा है, न कि वहां जा रहा है। हमें यह समझना होगा कि चीनी कंपनी के फायदे का ध्यान रखने और चीनी कंपनी के जरिए देश का हित साधने में बड़ा फर्क है।

2. बोर्ड केंद्र सरकार को 42% टैक्स देता
धूमल ने कहा कि चीनी कंपनियां भारत में अपने प्रोडक्ट बेचकर जो पैसा कमाती हैं, उसका बड़ा हिस्सा ब्रांड प्रमोशन के नाम पर बीसीसीआई को मिलता है। बोर्ड उस कमाई पर केंद्र सरकार को 42% टैक्स देता है। ऐसे में यह करार चीन के नहीं, बल्कि भारत के फायदे में है।

3. चीन की कंपनियों को भारत में प्रोडक्ट बेचने की इजाजत है
ट्रेजरर ने कहा कि अगर चीन का पैसा भारतीय क्रिकेट की मदद कर रहा है, तो हमें इससे कोई दिक्कत नहीं। हम गैर-चीनी या भारतीय कंपनियों से भी स्पॉन्सरशिप का पैसा हासिल कर सकते हैं। सोच यही है कि जब चीनी कंपनियों को भारत में उनके प्रोडक्ट बेचने की इजाजत दी जा रही है, तो बेहतर यही होगा कि वह पैसा भारतीय इकोनॉमी में लौटे।  

4. हम चीन के सामान पर निर्भरता कम करने के पक्ष में
बोर्ड के ट्रेजरर ने कहा कि मैं निजी तौर पर चीन के सामान पर निर्भरता कम करने के पक्ष में हूं, लेकिन जब तक वहां की कंपनियों को देश में कारोबार करने की इजाजत है, तब तक अगर कोई चीनी कंपनी आईपीएल जैसे भारतीय ब्रांड को स्पॉन्सर करती है, तो उसमें कोई बुराई नहीं।

5. एक भी क्रिकेट स्टेडियम का ठेका चीनी कंपनी को नहीं दिया
धूमल ने कहा कि अगर मैं किसी चीनी कंपनी को देश में क्रिकेट स्टेडियम बनाने का ठेका देता, तो मैं सीधे तौर पर उनकी मदद करता। गुजरात क्रिकेट एसोसिशएन ने मोटेरा में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाया, लेकिन उसका कॉन्ट्रैक्ट एक भारतीय कंपनी एलएंडटी को दिया। देश में हजारों करोड़ की लागत से क्रिकेट इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जा रहा है, लेकिन इसमें से एक का भी कॉन्ट्रैक्ट चीनी कंपनी को नहीं दिया गया।

पिछले साल ओप्पो टीम इंडिया की स्पॉन्सर थी
चीनी मोबाइल कंपनी ओप्पो पिछले साल सितंबर तक टीम इंडिया को स्पॉन्सर कर रही थी। हालांकि, इसके बाद से बेंगलुरु की ऐप बेस्ड एजुकेशन कंपनी बायजू भारतीय टीम को स्पॉन्सर कर रही है। बीसीसीआई ने बायजू से जो करार किया है, वह 5 सितंबर 2019 से 31 मार्च 2022 तक लागू रहेगा।

ओप्पो ने 768 करोड़ में टीम इंडिया की जर्सी के राइट्स खरीदे थे
इससे पहले, मार्च 2017 में ओप्पो ने वीवो को पीछे छोड़कर 768 करोड़ में 5 साल के लिए टीम इंडिया की जर्सी के राइट्स खरीदे थे। उस डील के मुताबिक, ओप्पो को बायलैट्रल सीरीज के एक मैच में बीसीसीआई को 4.61 करोड़ रुपए देने थे, जबकि आईसीसी टूर्नामेंट में हर मैच के लिए उसे 1.56 करोड़ रुपए चुकाने थे।



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