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Delhi Hospital Treatment Anil Baijal Order

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Edited By Vineet Tripathi | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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नई दिल्ली

दिल्ली में एक तरफ तो कोरोना वायरस (Delhi Coronavirus) का संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है दूसरी तरफ राजनीति भी चरम में पहुंच गई है। रविवार को सीएम केजरीवाल ने एक फैसला लिया था जिसमें दिल्ली सरकार के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों (Delhi Hospital Treatment) में सिर्फ दिल्ली के लोगों का ही इलाज हो सकता है और बाहरी कोई व्यक्ति दिल्ली में इलाज नहीं करा सकता। इस फैसले की काफी आलोचना भी हुई थी। कुछ देर पहले दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल (Anil Baijal) ने फैसले को बदलते हुए एक नया आदेश पास किया। अब दिल्ली में कोई भी व्यक्ति इलाज करा सकता है। अब सवाल ये पैदा होता है कि किसका फैसला सही है किसका गलत।

केजरीवाल ने वीडियो संदेश में क्या कहा था?

अरविंद केजरीवाल ने रविवार को एक वीडियो संदेश में बताया कि उनकी कैबिनेट ने ये फ़ैसला लिया है कि दिल्ली के अस्पताल केवल दिल्ली के लोगों के लिए रिज़र्व होने चाहिए। केजरीवाल ने कहा कि सोमवार से दिल्ली की सीमाएं खोली जा रही हैं, ये सीमाएं एक हफ्ते पहले सील की गई थीं क्योंकि सरकार को लगा था कि अगर सीमा खुली तो देश भर से मरीज दिल्ली आएंगे और ऐसे में अगर वो दिल्ली के अस्पतालों में गए तो क्या कोरोना का इलाज कर रहे ये अस्पताल इस दबाव को बर्दाश्त कर पाएंगे?

केजरीवाल का दावा

केजरीवाल ने दावा किया था कि महामारी फैलने से पहले तक किसी भी वक्त में दिल्ली के अस्पतालों में 60 से 70 फीसदी मरीज दूसरे राज्यों के होते थे। लेकिन इस वक़्त दिल्ली खुद बहुत बड़ी समस्या में है। दिल्ली में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं जिससे निपटने के लिए सरकार बेड्स का इंतजाम कर रही है। ऐसी स्थिति में दिल्ली के अस्पतालों को अगर पूरे देश के लिए खोल दिया गया तो दिल्ली के लोगों को कोरोना हुआ तो वो कहां जाएंगे?

दिल्ली के उपराज्यपाल ने पलटा केजरीवाल सरकार का फैसला

जनता से मांगे थे सुझाव

केजरीवाल सरकार ने पिछले सप्ताह इस बारे में जनता से राय मांगी थी जिसके बाद साढ़े सात लाख लोगों ने अपने सुझाव भेजे और केजरीवाल सरकार द्वारा दावा किया गया कि 90% से ज्यादा लोगों का कहना था कि जब तक कोरोना है तब तक दिल्ली के अस्पताल दिल्ली वालों के लिए रिजर्व होने चाहिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि साथ ही सरकार की ओर से गठित पांच डॉक्टरों की एक समिति ने भी यही सुझाव दिया कि दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, जून के अंत तक यहां 15,000 बेड्स की जरूरत होगी। इसलिए कुछ महीनों के लिए दिल्ली के सारे अस्पताल केवल दिल्ली के लोगों के लिए होने चाहिए।

बीते एक सप्ताह से हर दिन एक हजार मरीज

दरअसल, राजधानी दिल्ली में बीते एक सप्ताह में हर दिन एक हजार से ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं। दिल्ली के अस्पतालों में मरीज को भर्ती करने की भी जगह नहीं बची है। आलम ये हो गया है कि दिल्ली में रेलवे का आइसोलेशल कोच लगाना पड़ गया। देश में पहली बार किसी भी राज्य में आइसोलेशल कोच की जरूरत पड़ी। दिल्ली स्वास्थ्य मंत्रालय की मानें तो रविवार को दिल्ली में 1282 मामले और 51 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले अगर शनिवार की बात करें तो 1320 नए मामले और 53 लोगों की मौत हुई थी। शुक्रवार के आंकड़े देखें तो 1330 नए मामले और 58 लोगों की मौत हुई थी। चार जून को भी 1359 नए मामले और 44 लोगों की मौत हुई थी। एक जून से हर रोज अब तक एक हजार से ज्यादा मरीज निकल रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल बोले- ‘दिल्ली के अस्पतालों’ में अब सिर्फ दिल्लीवालों का इलाज होगा

स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री की चिंता

दिल्‍ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि अगले दो हफ्ते में राजधानी में कोरोना के केस डबल होकर 56 हजार तक पहुंच जाएंगे। रविवार को मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘हमें सुझाव मिले हैं कि अगर दिल्ली के सारे अस्पतालों को सबके लिए खोल दिए, तो अस्पतालों में उपलब्ध 9000 कोविड-19 बेड मात्र 3 दिन के अंदर भर जाएंगे।’ दिल्ली सरकार द्वारा बनाई गई एक विशेष कमेटी ने जून के अंत तक दिल्ली को 15 हजार बेड की जरूरत पड़ने की संभावना जताई है।

इतने सारे मरीज

राजधानी दिल्ली पूरे देश में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों की लिस्ट में तीसरे पायदान पर पहुंच चुका है। सोमवार सुबह तक दिल्‍ली में करीब 29 हजार मामले हो चुके थे। इनमें से 10,999 कोरोना मरीज अभी तक स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं 17,125 ऐक्टिव मरीज अभी भी इलाज करा रहे हैं। दिल्ली सरकार के मुताबिक, 12,213 कोरोना पेशंट्स को उनके घरों में ही आइसोलेशन में रहने को कहा गया है। यहां मरने वालों की संख्‍या 812 पहुंच चुकी है। दिल्ली में कोरोना हॉटस्पॉट्स की संख्या भी बढ़कर 169 हो चुकी है।

किसका फैसला सही किसका गलत

फिलहाल देश की राजधानी दिल्ली में पूरे देश से लोग अच्छे इलाज की उम्मीद लेकर आते है। कई शहरों में अस्पताल दिल्ली के लिए रेफर कर देते हैं ऐसे में वो मरीज यहां इलाज नहीं करा सकता था। इस फैसले के खिलाफि कई संगठनों और सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूटा था। लोगों का कहना था कि दिल्ली केवल एक राज्य या शहर नहीं है बल्कि पूरे देश की राजधानी है ऐसे में सबका हक है कि वो कहीं भी जाकर इलाज कराए। अब इस फैसले को उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने बदल दिया है। अब नए फैसले के मुताबिक कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रदेश का किसी भी शहर का हो दिल्ली में आकर इलाज करा सकता है। अब किसका फैसला सही है किसका गलत ये तो आप ही तय कर सकते हैं।

केजरीवाल को बुखार, कल होगा कोरोना टेस्‍टकेजरीवाल को बुखार, कल होगा कोरोना टेस्‍टकोरोना वायरस से जूझ रही दिल्‍ली के लिए एक और चिंताजनक खबर है। मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तबीयत खराब हो गई है। उन्‍हें रविवार से हल्‍का बुखार और गले में खराश है। मंगलवार को उनका कोरोना टेस्ट कराया जाएगा।



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